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हमारा गणतंत्र दिवस !

3 Feb 2026 4:40 PM | Anonymous

- By Asha

हमारा गणतंत्र दिवस !

मैं भारत माँ पर गर्व करूँ

औ” नित नित शीश नवाऊँ,

मेरी वाणी में सामर्थ कहाँ

गुणगान जो उसका कर पाऊँ।

वर्षों से गुलामी की बेड़ी ने

भारत माँ को जकड़ा था,

वीर शहीदों ने दी आहुति

संघर्ष कर जंजीरों को तोड़ा था।

पुलकित मन से हम सबने

देखी आज़ादी की नई भोर ,

अब अपने हाथों में सहेज

थामीं हमने दायित्व डोर।

मिल जुल कर कुछ विद्वानों ने

लिखा फिर अपना संविधान,

जिसमें है नीहित हित सबके

ऐसा है अपना विधि विधान।

समान न्याय ,अधिकारों का

वर्णन इसमें हमें मिलता है,

सुशासन से अपना देश चले

इसकी ये व्यवस्था करता है।

२६ जनवरी सन पचास से इस दिन

हम ‘गणतंत्र दिवस ‘ मनाते हैं,

लोकतंत्र है शासन का स्वरूप

हम मिल कर देश चलाते हैं।

सारे देश के सब संस्थानों में

उत्सव ये मनाया जाता है ,

मुँह मीठा कर और खुश हो कर

तिरंगा फहराया जाता है ।

दिल्ली में ‘कर्तव्य पथ’पर इस दिन

सेनाएँ करती हैं शौर्य प्रदर्शन,

सांस्कृतिक झाँकियाँ मन मोहे

लोक धुन पर करते हैं नर्तन।

सेना से सलामी लेते हैं

अपने माननीय राष्ट्रपति,

स्नेह निमंत्रण भेजे जाते

विदेशों से आते मुख्य अतिथि।

गणमान्य सभी और जन समूह

यह परेड देखने आते हैं ,

खुश हो कर करतल ध्वनि से वो

सबका उत्साह बढ़ाने हैं ।

अति भव्य आयोजन होता वहाँ

सैनिक कर्तव्य निभाते हैं,

संगीत के सुर में ताल मिला

मनोहारी दृश्य दिखाते हैं।

नए शस्त्र और तकनीकों को

मिलता इस दिन सम्मान वहाँ

वायुयान करतब दिखाते नभ पर

जयघोष का गूँजे नाद वहाँ।

अपने देश की धरती पावन है

संस्कृति व विरासत है महान,

ऋतुएँ सारी होती हैं यहाँ

है खड़ा हिमालय सीना तान।

अपने श्रम और शुभ कर्मों से

भारत को श्रेष्ठ बनाना है ,

हो विश्व में जय जयकार सदा

सुख शांति कि अलख जगाना है।

वंदे मातरम !


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